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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
3.230.15
स्कन्द उवाच
मातरो हि भवत्यो मे भवतीनामहं सुत:।
उच्यतां यन्मया कार्यं भवतीनामथेप्सितम्॥ १५॥
अनुवाद
स्कन्द बोले - "तुम मेरी माताएँ हो। मैं तुम्हारा पुत्र हूँ। तुम जो भी कार्य करना चाहो, वह मुझसे कहो, जो मेरे द्वारा सम्पन्न हो सके।" ॥15॥
Skanda said, "You are my mothers. I am your son. Tell me whatever work you desire which can be accomplished by me." ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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