Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.230.13: स्कन्द बोले - ऐसा ही हो माता! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आप पुत्रवत स्नेह रखते हुए मुझे कर्तव्य का आदेश देती रहें। देवि! आप अपनी पुत्रवधू देवसेना द्वारा सदैव सम्मानित होकर यहाँ रहेंगी। 13. | mahabharat अध्याय 3.230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्कन्द बोले - ऐसा ही हो माता! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आप पुत्रवत स्नेह रखते हुए मुझे कर्तव्य का आदेश देती रहें। देवि! आप अपनी पुत्रवधू देवसेना द्वारा सदैव सम्मानित होकर यहाँ रहेंगी। 13.
Skanda said - So be it, mother! I salute you. You keep on giving me the orders of duty while having the affection of a son. Devi! You will always stay here respected by your daughter-in-law Devasena. 13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥