Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.23.16: तत्पश्चात सब लोगों ने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, द्रौपदी और नकुल-सहदेव को विदा किया और युधिष्ठिर की अनुमति प्राप्त करके दुःखी होकर अपने देश को चले गए॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.23: पाण्डवोंका द्वैतवनमें जानेके लिये उद्यत होना और प्रजावर्गकी व्याकुलता   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डवोंका द्वैतवनमें जानेके लिये उद्यत होना और प्रजावर्गकी व्याकुलता  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.23.16 
आमन्त्र्य पार्थं च वृकोदरं च
धनंजयं याज्ञसेनीं यमौ च।
प्रतस्थिरे राष्ट्रमपेतहर्षा
युधिष्ठिरेणानुमता यथास्वम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात सब लोगों ने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, द्रौपदी और नकुल-सहदेव को विदा किया और युधिष्ठिर की अनुमति प्राप्त करके दुःखी होकर अपने देश को चले गए॥16॥
 
Thereafter, everyone bid farewell to Kunti's son Yudhishthir, Bhimsen, Arjun, Draupadi and Nakul-Sahadeva and after receiving Yudhishthir's permission, they left for their country in sadness. 16॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्वैतवनप्रवेशे त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्वैतवनप्रवेशविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)