Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.23.10: धिक्कार है धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को, जो क्रूर बुद्धि वाला है। धिक्कार है सुबलपुत्र शकुनि को, और धिक्कार है पापी कर्ण को, जो पापी हैं, जो सदा धर्म में लगे रहते हैं, वे इस प्रकार तुम्हारा अनिष्ट करना चाहते हैं।॥10॥ | mahabharat अध्याय 3.23: पाण्डवोंका द्वैतवनमें जानेके लिये उद्यत होना और प्रजावर्गकी व्याकुलता । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धिग् धार्तराष्ट्रं सुनृशंसबुद्धिं
धिक् सौबलं पापमतिं च कर्णम्।
अनर्थमिच्छन्ति नरेन्द्र पापा
ये धर्मनित्यस्य सतस्तवैवम्॥ १०॥
अनुवाद
धिक्कार है धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को, जो क्रूर बुद्धि वाला है। धिक्कार है सुबलपुत्र शकुनि को, और धिक्कार है पापी कर्ण को, जो पापी हैं, जो सदा धर्म में लगे रहते हैं, वे इस प्रकार तुम्हारा अनिष्ट करना चाहते हैं।॥10॥
Shame on Duryodhan, the son of Dhritarashtra, who has a cruel mind. Shame on Shakuni, the son of Subala, and Karna, who has sinful thoughts, who are sinners, who always remain devoted to Dharma, want to harm you in this way.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥