श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.229.52 
श्रीजुष्ट: पञ्चमीं स्कन्दस्तस्माच्छ्रीपञ्चमी स्मृता।
षष्ठॺां कृतार्थोऽभूद् यस्मात् तस्मात् षष्ठी महातिथि:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
पंचमी तिथि को स्कंददेव ने श्री यानी शोभा की सेवा की, इसलिए उस तिथि को श्री पंचमी कहा जाता है और षष्ठी को आशीर्वाद पूरा हुआ, इसलिए षष्ठी को महातिथि माना गया। 52॥
 
On Panchami Tithi, Skanddev served Shri i.e. Shobha, hence that date is called Shri Panchami and on Shashthi, blessings were fulfilled, hence Shashthi was considered as Mahathithi. 52॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसे स्कन्दोपाख्याने एकोनत्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानके प्रसंगमें स्कन्दोपाख्यानसम्बन्धी दो सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)