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बृहस्पतिर्मन्त्रविद्धि जजाप च जुहाव च।
एवं स्कन्दस्य महिषीं देवसेनां विदुर्जना:॥ ४९॥
अनुवाद
उस समय मन्त्रों के ज्ञाता बृहस्पतिजी ने वैदिक मन्त्रों का पाठ किया और अग्नि-यज्ञ किया। इस प्रकार सभी को ज्ञात हो गया कि देवसेना कुमार कार्तिकेय की पत्नी हैं।
At that time Brihaspatiji, the knower of mantras, recited the Vedic mantras and performed a fire sacrifice. In this way everyone came to know that Devasena is the consort of Kumar Kartikeya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥