श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.229.49 
बृहस्पतिर्मन्त्रविद्धि जजाप च जुहाव च।
एवं स्कन्दस्य महिषीं देवसेनां विदुर्जना:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उस समय मन्त्रों के ज्ञाता बृहस्पतिजी ने वैदिक मन्त्रों का पाठ किया और अग्नि-यज्ञ किया। इस प्रकार सभी को ज्ञात हो गया कि देवसेना कुमार कार्तिकेय की पत्नी हैं।
 
At that time Brihaspatiji, the knower of mantras, recited the Vedic mantras and performed a fire sacrifice. In this way everyone came to know that Devasena is the consort of Kumar Kartikeya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)