ता: समासाद्य भगवान् सर्वभूतगणैर्वृत:॥ ४३॥
अर्चितस्तु स्तुतश्चैव सान्त्वयामास ता अपि।
अनुवाद
भगवान स्कन्द ने सम्पूर्ण प्राणियों से घिरे हुए उन दिव्य सेनाओं को अपने निकट पाकर उन्हें सान्त्वना दी और स्वयं भी उनसे पूजित और स्तुति प्राप्त की ॥ 43 1/2॥
Lord Skanda, surrounded by all the living creatures, found these divine armies near him and consoled them and was himself worshipped and praised by them. ॥ 43 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)