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mahabharat 3.229.41-42h: उस समय इन सबसे घिरे हुए देवताओं द्वारा अभिषिक्त अग्निनन्दन कार्तिकेय नाना प्रकार के खेल खेलते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे। देवताओं ने सेनापति पद पर अभिषिक्त कुमार महासेन को ऐसे देखा, मानो अंधकार का नाश करके सूर्यदेव उदय हो गए हों।   |   mahabharat अध्याय 3.229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  3.229.41-42h 
क्रीडन् भाति तदा देवैरभिषिक्तश्च पावकि:।
अभिषिक्तं महासेनमपश्यन्त दिवौकस:॥ ४१॥
विनिहत्य तम: सूर्यं यथेहाभ्युदितं तथा।
 
 
अनुवाद
उस समय इन सबसे घिरे हुए देवताओं द्वारा अभिषिक्त अग्निनन्दन कार्तिकेय नाना प्रकार के खेल खेलते हुए अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे। देवताओं ने सेनापति पद पर अभिषिक्त कुमार महासेन को ऐसे देखा, मानो अंधकार का नाश करके सूर्यदेव उदय हो गए हों।
 
At that time, surrounded by all these, Agninandan Kartikeya, anointed by the gods, was looking very splendid while playing various games. The gods saw Kumar Mahasena, anointed as the commander-in-chief, as if the Sun God had risen after destroying the darkness. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)