श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.229.35 
विवेश कवचं चास्य शरीरे सहजं तथा।
युध्यमानस्य देवस्य प्रादुर्भवति तत् सदा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
और स्कन्ददेव के शरीर में एक प्राकृतिक कवच उत्पन्न हो गया, जो युद्ध करते समय सदैव प्रकट होता था ॥35॥
 
And there came into the body of Skandadev a natural armor, which always appeared when he was fighting. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)