vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह
»
श्लोक 35
श्लोक
3.229.35
विवेश कवचं चास्य शरीरे सहजं तथा।
युध्यमानस्य देवस्य प्रादुर्भवति तत् सदा॥ ३५॥
अनुवाद
और स्कन्ददेव के शरीर में एक प्राकृतिक कवच उत्पन्न हो गया, जो युद्ध करते समय सदैव प्रकट होता था ॥35॥
And there came into the body of Skandadev a natural armor, which always appeared when he was fighting. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×