श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.229.34 
या चेष्टा सर्वभूतानां प्रभा शान्तिर्बलं तथा।
अग्रतस्तस्य सा शक्तिर्देवानां जयवर्धिनी॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों में विद्यमान ऊर्जा, तेज, शांति और बल ही कुमार कार्तिकेय के सम्मुख शक्ति रूप में विद्यमान हैं। वे देवताओं की विजय को बढ़ाती हैं ॥ 34॥
 
The energy, radiance, peace and strength present in all living beings is present in the form of Shakti in front of Kumar Kartikeya. She increases the victory of the gods. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)