Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.229.33: अग्निदेव ने स्कन्द के लिए मुर्गे के चिह्न से सुशोभित एक ऊँची ध्वजा प्रदान की थी, जो अपने अरुणप्रभा से प्रलयंकारी अग्नि के समान रथ पर चमकती थी ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.229.33 
कुक्‍कुटश्चाग्निना दत्तस्तस्य केतुरलंकृत:।
रथे समुच्छ्रितो भाति कालाग्निरिव लोहित:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव ने स्कन्द के लिए मुर्गे के चिह्न से सुशोभित एक ऊँची ध्वजा प्रदान की थी, जो अपने अरुणप्रभा से प्रलयंकारी अग्नि के समान रथ पर चमकती थी ॥33॥
 
Agnidev had provided a high flag decorated with the symbol of a chicken for Skanda, which used to shine on the chariot like a fire of destruction with its Aruna Prabha. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)