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mahabharat 3.229.32: अग्निनन्दन स्कन्द अपने शरीर से कान्तियुक्त, कांतियुक्त, दो स्वच्छ लाल वस्त्र धारण किये हुए ऐसे शोभा पा रहे थे, मानो भगवान अंशुमाली (सूर्य) दो लाल बादलों से सुशोभित हों।   |   mahabharat अध्याय 3.229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.229.32 
अरजे वाससी रक्ते वसान: पावकात्मज:।
भाति दीप्तवपु: श्रीमान् रक्ताभ्राभ्यामिवांशुमान्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अग्निनन्दन स्कन्द अपने शरीर से कान्तियुक्त, कांतियुक्त, दो स्वच्छ लाल वस्त्र धारण किये हुए ऐसे शोभा पा रहे थे, मानो भगवान अंशुमाली (सूर्य) दो लाल बादलों से सुशोभित हों।
 
Agninandana Skanda was looking so beautiful with his body radiant and shining, wearing two clean red clothes, as if Lord Anshumali (Sun) was adorned with two red clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)