vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह
»
श्लोक 27
श्लोक
3.229.27
अर्चयामास सुप्रीतो भगवान् गोवृषध्वज:।
रुद्रमग्निं द्विजा: प्राहू रुद्रसूनुस्ततस्तु स:॥ २७॥
अनुवाद
भगवान वृषध्वज (शिव) ने अत्यन्त प्रसन्न होकर स्कन्ध का आदर किया। ब्राह्मण अग्नि को रुद्र का स्वरूप कहते हैं, अतः स्कन्द भगवान रुद्र के पुत्र हैं। 27॥
Lord Vrishadhwaj (Shiva) became very happy and honored Skandha. Brahmins call Agni the form of Rudra, hence Skanda is the son of Lord Rudra. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×