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mahabharat 3.229.27: भगवान वृषध्वज (शिव) ने अत्यन्त प्रसन्न होकर स्कन्ध का आदर किया। ब्राह्मण अग्नि को रुद्र का स्वरूप कहते हैं, अतः स्कन्द भगवान रुद्र के पुत्र हैं। 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.229.27 
अर्चयामास सुप्रीतो भगवान् गोवृषध्वज:।
रुद्रमग्निं द्विजा: प्राहू रुद्रसूनुस्ततस्तु स:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भगवान वृषध्वज (शिव) ने अत्यन्त प्रसन्न होकर स्कन्ध का आदर किया। ब्राह्मण अग्नि को रुद्र का स्वरूप कहते हैं, अतः स्कन्द भगवान रुद्र के पुत्र हैं। 27॥
 
Lord Vrishadhwaj (Shiva) became very happy and honored Skandha. Brahmins call Agni the form of Rudra, hence Skanda is the son of Lord Rudra. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)