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स्कन्द उवाच
त्वमेव राजा भद्रं ते त्रैलोक्यस्य ममैव च॥ १९॥
करोमि किं च ते शक्र शासनं तद् ब्रवीहि मे।
अनुवाद
स्कन्द बोले - देवेन्द्र! आप देवराज पद से विभूषित हों। आपका कल्याण हो। आप तीनों लोकों के और मेरे भी स्वामी हैं। आपकी कौन सी आज्ञा का पालन करूँ? कृपा करके मुझे यह बताइए॥19 1/2॥
Skanda said - Devendra! May you be honoured with the position of Devraj. May you be blessed. You are the master of all three worlds and me as well. Which of your orders should I obey? Kindly tell me this.॥19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥