श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.229.13 
शक्र उवाच
भवस्वेन्द्रो महाबाहो सर्वेषां न: सुखावह:।
अभिषिच्यस्व चैवाद्य प्राप्तरूपोऽसि सत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा- महाबाहो! आप इन्द्र बनकर हम सबको सुख पहुँचाएँ। हे पुण्यात्मा! आप इस पद के सर्वथा योग्य हैं। अतः आज ही इस पद पर अभिषिक्त हो जाइए॥13॥
 
Indra said- Mahabaho! You become Indra and bring happiness to all of us. O most virtuous! You are absolutely worthy of this position. Therefore, get yourself anointed to this position today itself.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)