श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.229.12 
एतदिन्द्रेण कर्तव्यमिन्द्रे हि विपुलं बलम्।
त्वं च वीर बली श्रेष्ठस्तस्मादिन्द्रो भवस्व न:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह सब इन्द्र का ही काम है। इन्द्र में अनन्त शक्ति है। वीर! तुम भी अत्यन्त शक्तिशाली हो। अतः तुम हमारे इन्द्र बन जाओ॥ 12॥
 
All this is the work of Indra. Indra has infinite power. Brave! You are also very powerful. Therefore, you become our Indra.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)