श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 229: स्कन्दका इन्द्रके साथ वार्तालाप, देवसेनापतिके पदपर अभिषेक तथा देवसेनाके साथ उनका विवाह  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.229.11 
असूर्ये च भवेत् सूर्यस्तथाचन्द्रे च चन्द्रमा:।
भवत्यग्निश्च वायुश्च पृथिव्यापश्च कारणै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सूर्य के अभाव में वे स्वयं सूर्य बन जाते हैं और चन्द्रमा के अभाव में वे स्वयं चन्द्रमा बनकर उसके कार्य करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं अग्नि, वायु, पृथ्वी और जल का रूप धारण कर लेते हैं।॥11॥
 
In the absence of the Sun, He himself becomes the Sun and in the absence of the Moon, He Himself becomes the Moon and carries out its functions. When required, He Himself assumes the form of fire, air, earth and water.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)