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mahabharat 3.228.3-4: उपर्युक्त कुमार ग्रहों ने विशाखा (स्कंद) को अपना पिता माना। भगवान स्कंद, बकरे का मुख धारण करके, अपनी समस्त पुत्रियों और पुत्रों से घिरे हुए, मातृकाओं के सामने युद्ध में अपने पक्ष की रक्षा करते हैं। वे 'भद्रशाखा' और 'कौसल' नामों से प्रसिद्ध हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.228: स्कन्दके पार्षदोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 228: स्कन्दके पार्षदोंका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  3.228.3-4 
कुमारास्ते विशाखं च पितृत्वे समकल्पयन्।
स भूत्वा भगवान् संख्ये रक्षंश्छागमुखस्तदा॥ ३॥
वृत: कन्यागणै: सर्वैरात्मीयै: सह पुत्रकै:।
मातॄणां प्रेक्षमाणानां भद्रशाखश्च कौसल:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त कुमार ग्रहों ने विशाखा (स्कंद) को अपना पिता माना। भगवान स्कंद, बकरे का मुख धारण करके, अपनी समस्त पुत्रियों और पुत्रों से घिरे हुए, मातृकाओं के सामने युद्ध में अपने पक्ष की रक्षा करते हैं। वे 'भद्रशाखा' और 'कौसल' नामों से प्रसिद्ध हैं।
 
The aforementioned Kumar planets considered Visakha (Skanda) as their father. Lord Skanda, assuming the face of a goat, surrounded by all his daughters and sons, protects his side in the war in front of the Matrikas. He is famous by the names 'Bhadrashakha' and 'Kausal'. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)