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mahabharat 3.227.8-9: उस समय सभी देवता और ऋषिगण उनका बड़ा आदर-सत्कार कर रहे थे। जब देवराज इन्द्र कुमार कार्तिकेय के पास आए, तो उन्होंने देवताओं के साथ सिंह के समान गर्जना की। उनकी गर्जना सुनकर कुमार कार्तिकेय भी समुद्र के समान गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  3.227.8-9 
सम्पूज्यमानस्त्रिदशैस्तथैव परमर्षिभि:।
समीपमथ सम्प्राप्त: कार्तिकेयस्य वासव:॥ ८॥
सिंहनादं ततश्चक्रे देवेश: सहित: सुरै:।
गुहोऽपि शब्दं तं श्रुत्वा व्यनदत् सागरो यथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय सभी देवता और ऋषिगण उनका बड़ा आदर-सत्कार कर रहे थे। जब देवराज इन्द्र कुमार कार्तिकेय के पास आए, तो उन्होंने देवताओं के साथ सिंह के समान गर्जना की। उनकी गर्जना सुनकर कुमार कार्तिकेय भी समुद्र के समान गर्जना करने लगे।
 
At that time all the gods and sages were giving him great respect. When Devraj Indra came near Kumar Kartikeya, he roared like a lion along with the gods. Hearing his roar, Kumar Kartikeya also started roaring like the ocean. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)