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mahabharat 3.227.5-6: देवताओं की सेना बड़ी भयानक थी। वह बड़े जोर से गर्जना कर रही थी। उसका तेज बहुत दूर तक फैल रहा था। उसके ध्वज और कवच अद्वितीय थे। सभी सैनिकों के वाहन और धनुष नाना प्रकार के थे। सबने अपने शरीर उत्तम वस्त्रों से ढके हुए थे। सभी धनवान और नाना प्रकार के आभूषणों से विभूषित दिख रहे थे। इंद्र को मारने के लिए आते देख कुमार ने भी उन पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  3.227.5-6 
उग्रं तं च महानादं देवानीकं महाप्रभम्।
विचित्रध्वजसंनाहं नानावाहनकार्मुकम्॥ ५॥
प्रवराम्बरसंवीतं श्रिया जुष्टमलङ्कृतम्।
विजिघांसुं तमायान्तं कुमार: शक्रमन्वयात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं की सेना बड़ी भयानक थी। वह बड़े जोर से गर्जना कर रही थी। उसका तेज बहुत दूर तक फैल रहा था। उसके ध्वज और कवच अद्वितीय थे। सभी सैनिकों के वाहन और धनुष नाना प्रकार के थे। सबने अपने शरीर उत्तम वस्त्रों से ढके हुए थे। सभी धनवान और नाना प्रकार के आभूषणों से विभूषित दिख रहे थे। इंद्र को मारने के लिए आते देख कुमार ने भी उन पर आक्रमण कर दिया।
 
The army of the gods was very terrifying. It was roaring loudly. Its glory was spreading very wide. Its flags and armor were unique. The vehicles and bows of all the soldiers were of various types. Everyone had covered their bodies with the best clothes. Everyone looked wealthy and adorned with various ornaments. Seeing Indra coming to kill him, Kumar also attacked him. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)