Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.227.15: महाराज! इन्द्र द्वारा छोड़ा गया वह वज्र बहुत ही शीघ्रता से कुमार कार्तिकेय की दाहिनी पसली पर लगा और महाबुद्धिमान स्कन्द की पार्श्विका को भी विदीर्ण कर गया। | mahabharat अध्याय 3.227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद्विसृष्टं जघानाशु पार्श्वं स्कन्दस्य दक्षिणम्।
बिभेद च महाराज पार्श्वं तस्य महात्मन:॥ १५॥
अनुवाद
महाराज! इन्द्र द्वारा छोड़ा गया वह वज्र बहुत ही शीघ्रता से कुमार कार्तिकेय की दाहिनी पसली पर लगा और महाबुद्धिमान स्कन्द की पार्श्विका को भी विदीर्ण कर गया।
Maharaj! That thunderbolt released by Indra very quickly struck Kumar Kartikeya's right rib and lacerated the side of the great-minded Skanda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥