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mahabharat 3.227.12: इस प्रकार उसने देवताओं की सेना को जलाना आरम्भ कर दिया। सभी सैनिक भूमि पर गिरकर पीड़ा से तड़पने लगे। किसी के शरीर जल गए, किसी के सिर, किसी के हथियार जल गए और किसी के वाहन जल गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.227.12 
अदहद् देवसैन्यानि वेपमानानि भूतले।
ते प्रदीप्तशिरोदेहा: प्रदीप्तायुधवाहना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसने देवताओं की सेना को जलाना आरम्भ कर दिया। सभी सैनिक भूमि पर गिरकर पीड़ा से तड़पने लगे। किसी के शरीर जल गए, किसी के सिर, किसी के हथियार जल गए और किसी के वाहन जल गए॥12॥
 
In this manner he started burning the army of the gods. All the soldiers fell on the ground and started writhing in pain. Some got their bodies burnt, some got their heads, some got their weapons burnt and some got their vehicles burnt.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)