श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.226.9-10h 
षड्‍‍भिरेव तदा जातमाहुस्तद्वनवासिन:।
सप्तर्षीनाह च स्वाहा मम पुत्रोऽयमित्युत॥ ९॥
अहं जाने नैतदेवमिति राजन् पुन: पुन:।
 
 
अनुवाद
क्योंकि उस वन के निवासियों ने बताया था कि वह बालक छह पत्नियों के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। राजन! यद्यपि स्वाहना ने सप्तर्षियों से बार-बार कहा था कि 'यह मेरा पुत्र है। मैं इसके जन्म का रहस्य जानती हूँ; परंतु जैसा लोग समझ रहे हैं, वैसा यह नहीं है' (तब भी उन्हें उसकी बातों पर तुरन्त विश्वास न हुआ)।॥9 1/2॥
 
Because the inhabitants of that forest had told that the child was born from the wombs of six wives. King! Although Swahaana repeatedly told the Saptarishis that 'This is my son. I know the secret of his birth; it is not as people are making it out to be' (even then they could not immediately believe her words).॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)