श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.226.7 
सुपर्णी तु वच: श्रुत्वा ममायं तनयस्त्विति।
उपगम्य शनै: स्कन्दमाहाहं जननी तव॥ ७॥
 
 
अनुवाद
लोगों की बातें सुनकर गरुड़ ने कहा - ‘यह मेरा पुत्र है।’ फिर वे धीरे से स्कंद के पास गए और बोले - ‘बेटा! मैं वह माता हूँ जिसने तुम्हें जन्म दिया है।’ 7.
 
Garudi, after listening to the people's talk, said - 'This is my son.' Then he slowly went to Skanda and said - 'Son! I am the mother who gave birth to you.' 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)