श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  3.226.4-5h 
निवसन्ति वने ये तु तस्मिंश्चैत्ररथे जना:।
तेऽब्रुवन्नेष नोऽनर्थ: पावकेनाहितो महान्॥ ४॥
संगम्य षड्‍‍भि: पत्नीभि: सप्तर्षीणामिति स्म ह।
 
 
अनुवाद
चैत्ररथ नामक वन में रहने वाले लोगों ने कहा, 'अग्नि ने सात ऋषियों की छह पत्नियों के साथ संभोग करके हम पर यह महान विपत्ति ला दी है।'
 
The people who lived in the forest called Chaitrarath said, 'Agni has brought this great calamity upon us by having intercourse with the six wives of the seven sages.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)