श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.226.28 
लोहितस्योदधे: कन्या क्रूरा लोहितभोजना।
परिष्वज्य महासेनं पुत्रवत् पर्यरक्षत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
लाल सागर की एक क्रूर स्वभाव वाली कन्या थी, जिसका रक्त ही उसका आहार था। वह महासेनक को पुत्र के समान हृदय से लगाकर उसकी पूरी शक्ति से रक्षा करने लगी। 28॥
 
There was a cruel natured girl of Red Sea, whose blood was her food. She took Mahasenka to her heart like a son and started protecting him with all her might. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)