श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.226.26 
स तु सम्पूजितस्तेन सह मातृगणेन ह।
परिवार्य महासेनं रक्षमाण: स्थित: शिव:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कुमार महासेन द्वारा पूजित शुभ अग्निदेव मातृकाओं सहित उसे घेरे हुए खड़े हो गए और उसकी रक्षा करने लगे॥ 26॥
 
The auspicious Agni, worshipped by Kumar Mahasena, stood surrounding him along with the Matrikas and began to protect him.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)