श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.226.24 
अभिनन्दस्व न: सर्वा: प्रस्नुता: स्नेहविक्लवा:।
तासां तद् वचनं श्रुत्वा पातुकाम: स्तनान् प्रभु:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
देखो, हम अपने पुत्रों के प्रेम से व्याकुल हो रही हैं, हमारे स्तनों से दूध बह रहा है, कृपया उसे पीकर हम सबको सुखी करो।’ देवियों के ये वचन सुनकर समर्थ स्कन्द के मन में उन्हें स्तनपान कराने की इच्छा उत्पन्न हुई।
 
Look, we are getting restless with love for our sons, our breasts are flowing with milk, please drink it and make us all happy.' On hearing these words of the Mother Goddesses, the desire to breastfeed them arose in the mind of Samartha Skanda. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)