श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.226.13 
मङ्गलानि च सर्वाणि कौमाराणि त्रयोदश।
जातकर्मादिकास्तस्य क्रियाश्चक्रे महामुनि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन महर्षि ने बालक के सभी शुभ संस्कार पूर्ण किए और जातकर्म सहित तेरह संस्कार भी किए॥13॥
 
That great sage completed all the auspicious rites of the child. He also performed thirteen rituals including Jaatkarma.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)