श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.226.12 
विश्वामित्रस्तु प्रथमं कुमारं शरणं गत:।
स्तवं दिव्यं सम्प्रचक्रे महासेनस्य चापि स:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र ने पहले कुमार कार्तिकेय की शरण ली और दिव्य स्तोत्रों से महासेन की भी स्तुति की॥12॥
 
Viswamitra first sought refuge in Kumar Kartikeya and also praised Mahasena with divine hymns.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)