श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  3.226.10-11 
विश्वामित्रस्तु कृत्वेष्टिं सप्तर्षीणां महामुनि:॥ १०॥
पावकं कामसंतप्तमदृष्ट: पृष्ठतोऽन्वगात्।
तत् तेन निखिलं सर्वमवबुद्धं यथातथम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब महर्षि विश्वामित्र ने सप्तर्षियों की इष्टि पूरी कर ली, तब वे भी कामातुर अग्निदेव के पीछे-पीछे गुप्त रूप से चले गए। उस समय उन्हें कोई देख नहीं सकता था। अतः उन्हें सम्पूर्ण वृत्तांत यथार्थ रूप में ज्ञात हो गया॥10-11॥
 
When the great sage Vishwamitra had completed the Ishti of the Saptarishis, he too followed the lust-stricken Agni secretly. At that time no one could see him. Hence he came to know the whole story in its true form.॥10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)