श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.226.1 
मार्कण्डेय उवाच
तस्मिञ्जाते महासत्त्वे महासेने महाबले।
समुत्तस्थुर्महोत्पाता घोररूपा: पृथग्विधा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: हे राजन! उस अत्यंत धैर्यवान एवं पराक्रमी महासेन के जन्म के पश्चात् अनेक प्रकार की भयंकर विपत्तियाँ उत्पन्न होने लगीं।
 
Mārkaṇḍeya says: O King! After the birth of that very patient and mighty Mahasena, many different kinds of terrible calamities began to appear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)