vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 226: विश्वामित्रका स्कन्दके जातकर्मादि तेरह संस्कार करना और विश्वामित्रके समझानेपर भी ऋषियोंका अपनी पत्नियोंको स्वीकार न करना तथा अग्निदेव आदिके द्वारा बालक स्कन्दकी रक्षा करना
»
श्लोक 1
श्लोक
3.226.1
मार्कण्डेय उवाच
तस्मिञ्जाते महासत्त्वे महासेने महाबले।
समुत्तस्थुर्महोत्पाता घोररूपा: पृथग्विधा:॥ १॥
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: हे राजन! उस अत्यंत धैर्यवान एवं पराक्रमी महासेन के जन्म के पश्चात् अनेक प्रकार की भयंकर विपत्तियाँ उत्पन्न होने लगीं।
Mārkaṇḍeya says: O King! After the birth of that very patient and mighty Mahasena, many different kinds of terrible calamities began to appear.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×