Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.225.8: तत्पश्चात् कुछ विचार करके उन्होंने कहा - 'हे अग्निकुलपुत्र! जो लोग वन में मुझे इस रूप में देखेंगे, वे ब्राह्मणों की पत्नियों पर झूठा कलंक लगाएँगे।' | mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अचिन्तयन्ममेदं ये रूपं द्रक्ष्यन्ति कानने।
ते ब्राह्मणीनामनृतं दोषं वक्ष्यन्ति पावक॥ ८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् कुछ विचार करके उन्होंने कहा - 'हे अग्निकुलपुत्र! जो लोग वन में मुझे इस रूप में देखेंगे, वे ब्राह्मणों की पत्नियों पर झूठा कलंक लगाएँगे।'
Thereafter, after some thought, he said - 'O son of Agnikul! Those who will see me in this form in the forest will falsely accuse the wives of Brahmins. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥