Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.225.32: महाबाहु पुरुष ने उठकर उन सब प्राणियों को सान्त्वना दी और विशाल श्वेत पर्वत पर खड़े होकर धनुष खींचा और बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। 32. | mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तूत्थाय महाबाहुरुपसान्त्व्य च तान् जनान्।
धनुर्विकृष्य व्यसृजद् बाणान् श्वेते महागिरौ॥ ३२॥
अनुवाद
महाबाहु पुरुष ने उठकर उन सब प्राणियों को सान्त्वना दी और विशाल श्वेत पर्वत पर खड़े होकर धनुष खींचा और बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। 32.
The mighty-armed man stood up and consoled all those creatures and, standing on the great white mountain, drew his bow and began a shower of arrows. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥