Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.225.31: उस समय स्कन्ददेव की शरण में आये हुए नाना वर्णों वाले समस्त प्राणियों को ब्राह्मणों ने उनके अत्यंत बलवान सहयोगी बताया ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.225.31 
ये तु तं संश्रिता देवं नानावर्णास्तदा जना:।
तानप्याहु: पारिषदान् ब्राह्मणा: सुमहाबलान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस समय स्कन्ददेव की शरण में आये हुए नाना वर्णों वाले समस्त प्राणियों को ब्राह्मणों ने उनके अत्यंत बलवान सहयोगी बताया ॥31॥
 
At that time all the creatures belonging to various castes who took refuge in Skandadev were described by the Brahmins as his extremely powerful associates. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)