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mahabharat 3.225.26: तत्पश्चात् उस बलवान योद्धा ने दोनों हाथों में एक उत्तम शंख धारण करके उसे बजाया, जो बलवान प्राणियों को भी भयभीत करने में समर्थ था ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.225.26 
द्वाभ्यां भुजाभ्यां बलवान् गृहीत्वा शङ्खमुत्तमम्।
प्राध्मापयत भूतानां त्रासनं बलिनामपि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस बलवान योद्धा ने दोनों हाथों में एक उत्तम शंख धारण करके उसे बजाया, जो बलवान प्राणियों को भी भयभीत करने में समर्थ था ॥26॥
 
After that, that strong warrior held an excellent conch in both his hands and blew it, which was able to frighten even the strongest creatures. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)