श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.225.18 
एकग्रीवैकजठर: कुमार: समपद्यत।
द्वितीयायामभिव्यक्तस्तृतीयायां शिशुर्बभौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उस बालक की एक ही गर्दन और एक ही पेट था। वह दूसरे दिन पैदा हुआ और तीसरे दिन वह बालक रूप में सुन्दर दिखने लगा। 18.
 
But that child had only one neck and one stomach. He was born on the second day and on the third day he started looking beautiful in the form of a child. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)