Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.225.16-17: अग्निदेव की इच्छा करने वाली स्वाहा ने प्रथम दिन उस कुण्ड में अपना वीर्य प्रवाहित किया था। उस वीर्य के जमने (स्खलित होने) से वहाँ एक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ। ऋषियों ने उसका बहुत आदर किया। जमने के कारण ही वह स्कन्द कहलाया। उसके छह सिर, बारह कान, बारह नेत्र और बारह भुजाएँ थीं॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निदेव की इच्छा करने वाली स्वाहा ने प्रथम दिन उस कुण्ड में अपना वीर्य प्रवाहित किया था। उस वीर्य के जमने (स्खलित होने) से वहाँ एक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ। ऋषियों ने उसका बहुत आदर किया। जमने के कारण ही वह स्कन्द कहलाया। उसके छह सिर, बारह कान, बारह नेत्र और बारह भुजाएँ थीं॥16-17॥
Swaha, who desired Agnidev, had poured his semen in that kunda on the first day. That semen, which had coagulated (ejaculated), gave birth to a brilliant son there. The sages respected him a lot. Because he had coagulated, he was called Skanda. He had six heads, twelve ears, twelve eyes and twelve arms.॥16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥