Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.225.10: मार्कण्डेय कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर वह तुरंत गरुड़ का रूप धारण करके उस महान वन से बाहर चली गईं। आगे जाकर उन्होंने सरकण्डों के समूह से आच्छादित एक श्वेत पर्वत का शिखर देखा। | mahabharat अध्याय 3.225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेय कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर वह तुरंत गरुड़ का रूप धारण करके उस महान वन से बाहर चली गईं। आगे जाकर उन्होंने सरकण्डों के समूह से आच्छादित एक श्वेत पर्वत का शिखर देखा।
Markandeya says - O King! Saying this, she immediately assumed the form of Garudi and went out of that great forest. Going further, she saw the peak of a white mountain covered with a group of reeds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥