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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.224.38 
कामसंतप्तहृदयो देहत्यागविनिश्चित:।
अलाभे ब्राह्मणस्त्रीणामग्निर्वनमुपागमत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उसका हृदय काम की अग्नि से जल रहा था। उसने निश्चय कर लिया था कि यदि वह उन ब्रह्मर्षियों की पत्नियों से न मिल सका, तो वह अपना शरीर त्याग देगा। इसलिए वह वन में चला गया।
 
His heart was burning with the fire of lust. He had decided to give up his body if he could not meet the wives of those brahmarshis. So he went to the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)