Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.224.31: देवताओं को हवन सामग्री पहुँचाकर जब अग्निदेव वहाँ से जाने लगे, तो उनकी दृष्टि उन महर्षियों की पत्नियों पर पड़ी। उनमें से कुछ अपने आसन पर बैठी थीं और कुछ आराम से सो रही थीं। | mahabharat अध्याय 3.224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निष्क्रामंश्चाप्यपश्यत् स पत्नीस्तेषां महात्मनाम्।
स्वेष्वासनेषूपविष्टा: स्वपन्तीश्च तथा सुखम्॥ ३१॥
अनुवाद
देवताओं को हवन सामग्री पहुँचाकर जब अग्निदेव वहाँ से जाने लगे, तो उनकी दृष्टि उन महर्षियों की पत्नियों पर पड़ी। उनमें से कुछ अपने आसन पर बैठी थीं और कुछ आराम से सो रही थीं।
When Agnidev started to leave from there after delivering the offerings to the gods, his eyes fell on the wives of those great sages. Some of them were sitting on their seats and some were sleeping comfortably.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥