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mahabharat 3.224.27-28h: उन महात्मा ऋषियों ने शास्त्रीय विधि से जलती हुई अग्नि में इष्टिका संपन्न की और समस्त देवताओं को हविष्य अर्पित किया ॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  3.224.27-28h 
इष्टिं कृत्वा यथान्यायं सुसमिद्धे हुताशने॥ २७॥
जुहुवुस्ते महात्मानो हव्यं सर्वदिवौकसाम्।
 
 
अनुवाद
उन महात्मा ऋषियों ने शास्त्रीय विधि से जलती हुई अग्नि में इष्टिका संपन्न की और समस्त देवताओं को हविष्य अर्पित किया ॥27 1/2॥
 
Those Mahatma Rishis performed Ishtikha in the burning fire in the classical method and offered Havishya to all the Gods. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)