श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.224.23 
ब्रह्मोवाच
मयैतच्चिन्तितं कार्यं त्वया दानवसूदन।
तथा स भविता गर्भो बलवानुरुविक्रम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- दानवसूदन! इस विषय में जो कुछ तुमने सोचा है, वही मैंने भी सोचा है। ऐसा होने पर ही महान, बलवान और बलवान योद्धा का जन्म होगा॥ 23॥
 
Brahmaji said- Danavsudan! Whatever you have thought about this matter, I have also thought the same. Only when that happens will a great, powerful and strong warrior be born.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)