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mahabharat 3.224.17: 'ओह! इस समय चन्द्रमा और सूर्य पर यह भयंकर मण्डल दिखाई दे रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि रात्रि के अन्त में महायुद्ध छिड़ जाएगा।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.224.17 
सूर्याचन्द्रमसोर्घोरं दृश्यते परिवेषणम्।
एतस्मिन्नेव रात्र्यन्ते महद् युद्धं तु शंसति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'ओह! इस समय चन्द्रमा और सूर्य पर यह भयंकर मण्डल दिखाई दे रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि रात्रि के अन्त में महायुद्ध छिड़ जाएगा।॥17॥
 
‘Oh! At this moment this dreadful circle is visible on the moon and the sun. This indicates that by the end of the night a huge war will break out.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)