श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार  »  श्लोक d2-d3
 
 
श्लोक  3.223.d2-d3 
युधिष्ठिर उवाच
कुमारस्तु यथा जातो यथा चाग्ने: सुतोऽभवत्।
यथा रुद्राच्च सम्भूतो गङ्गायां कृत्तिकासु च॥
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं कौतूहलमतीव मे॥ )
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "ऋषिवर! कुमार (स्कंद) का जन्म कैसे हुआ? वे अग्नि के पुत्र कैसे हुए? भगवान शिव से उनका जन्म कैसे हुआ? और वे गंगा तथा छहों कृतिकाओं के गर्भ से कैसे प्रकट हुए? मैं यह सुनना चाहता हूँ। मुझे इस विषय में बड़ी जिज्ञासा है।"
 
Yudhishthira said - Sage! How was Kumar (Skanda) born? How was he the son of Agni? How was he born from Lord Shiva? And how did he appear from the womb of Ganga and the six Krittikas? I want to hear this. I am very curious about this.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd