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mahabharat 3.223.7: वह कह रही थी, "कोई वीर पुरुष दौड़कर आए और मेरी रक्षा करे। वह मुझे पति प्रदान करे या स्वयं मेरा पति बन जाए।"   |   mahabharat अध्याय 3.223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.223.7 
अभिधावतु मां कश्चित् पुरुषस्त्रातु चैव ह।
पतिं च मे प्रदिशतु स्वयं वा पतिरस्तु मे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह कह रही थी, "कोई वीर पुरुष दौड़कर आए और मेरी रक्षा करे। वह मुझे पति प्रदान करे या स्वयं मेरा पति बन जाए।"
 
She was saying, 'Some brave man should come running and protect me. He should provide me a husband or he himself should become my husband.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)