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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.223.4 
वध्यमानं बलं दृष्ट्वा बहुशस्तै: पुरंदर:।
स सैन्यनायकार्थाय चिन्तामाप भृशं तदा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब इंद्र ने देखा कि दैत्य बार-बार देवताओं की सेना का संहार कर रहे हैं, तो उन्हें एक योग्य सेनापति की आवश्यकता हुई। इस बात से वे बहुत चिंतित हुए।
 
When Indra saw that the demons were killing the army of the gods again and again, he needed a capable commander. He became very worried about this. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)