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mahabharat 3.223.13-14: तब केशी को क्रोध आया और उन्होंने पर्वत से एक शिला इंद्र पर फेंकी। हे राजन! उस शिला को अपने ऊपर गिरता देख इंद्र ने अपने वज्र से उसे खंडित कर दिया और वह शिला टुकड़े-टुकड़े होकर पृथ्वी पर गिर पड़ी। उस समय उस गिरती हुई शिला से केशी को बहुत चोट लगी।   |   mahabharat अध्याय 3.223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्रके द्वारा केशीके हाथसे देवसेनाका उद्धार  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  3.223.13-14 
अथास्य शैलशिखरं केशी क्रुद्धो व्यवासृजत्।
तदा पतन्तं सम्प्रेक्ष्य शैलशृङ्गं शतक्रतु:॥ १३॥
बिभेद राजन् वज्रेण भुवि तन्निपपात ह।
पतता तु तदा केशी तेन शृङ्गेण ताडित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब केशी को क्रोध आया और उन्होंने पर्वत से एक शिला इंद्र पर फेंकी। हे राजन! उस शिला को अपने ऊपर गिरता देख इंद्र ने अपने वज्र से उसे खंडित कर दिया और वह शिला टुकड़े-टुकड़े होकर पृथ्वी पर गिर पड़ी। उस समय उस गिरती हुई शिला से केशी को बहुत चोट लगी।
 
Then Kesi got angry and threw a rock from the mountain at Indra. O King! Seeing that rock falling on him, Indra broke it into pieces with his thunderbolt and it shattered into pieces and fell on the earth. At that time, that falling rock hurt Kesi very badly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)