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mahabharat 3.222.6: उस 'अद्भुत' या गृहस्थ के यहाँ अग्निरूपी पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम 'भरत' है। वे मृत पशुओं के शरीर को जलाते हैं। भरतक प्रतिदिन अग्निष्टोम यज्ञ में निवास करते हैं, इसलिए उन्हें 'नियत' भी कहते हैं। नियत का संकल्प उत्तम है। 6॥   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.222.6 
दहन् मृतानि भूतानि तस्याग्निर्भरतोऽभवत्।
अग्निष्टोमे च नियत: क्रतुश्रेष्ठो भरस्य तु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस 'अद्भुत' या गृहस्थ के यहाँ अग्निरूपी पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम 'भरत' है। वे मृत पशुओं के शरीर को जलाते हैं। भरतक प्रतिदिन अग्निष्टोम यज्ञ में निवास करते हैं, इसलिए उन्हें 'नियत' भी कहते हैं। नियत का संकल्प उत्तम है। 6॥
 
To that 'Adbhut' or householder, a son in the form of fire was born, whose name is 'Bharat'. They burn the bodies of dead animals. Bharatka resides daily in Agnishtom Yagya, hence he is also called 'Niyat'. Niyat's resolution is good. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)