Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.222.32: इस प्रकार मेरे द्वारा अग्निदेव की महान् वंशावली प्रतिपादित हुई। वे भगवान अग्नि विविध वेदमंत्रों से पूजित होकर प्राणियों द्वारा दी गई हविओं को देवताओं तक पहुँचाते हैं। 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.222.32 
इत्येष वंश: सुमहानग्नीनां कीर्तितो मया।
योऽर्चितो विविधैर्मन्त्रैर्हव्यं वहति देहिनाम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मेरे द्वारा अग्निदेव की महान् वंशावली प्रतिपादित हुई। वे भगवान अग्नि विविध वेदमंत्रों से पूजित होकर प्राणियों द्वारा दी गई हविओं को देवताओं तक पहुँचाते हैं। 32॥
 
In this way the great lineage of Agnidev was propounded by me. That Lord Agni, worshiped by various Veda mantras, delivers the offerings given by the living beings to the gods. 32॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसोपाख्यानेऽग्निसमुद्भवे द्वाविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानविषयक अग्निप्रादुर्भावसम्बन्धी दो सौ बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)